आयुर्वेद क्या है? | Information About Ayurveda | आयुर्विज्ञान

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आयुर्वेद (Ayurveda) की खोज सदियों साल हमारे ऋषि-मुनियों (Rishi-Mumuniyon) ने की थी और इसको आयुर्विज्ञान (Ayurvigyan) भी कहा जाता है। आयुर्वेद को ऋषि-मुनियों ने पांचवां वेद (Ved) भी कहा है। आयुर्वेद के बारे में जानकरी प्राप्त करने के लिए इसका संधि विच्छेद करना होगा। आये जाने इसका अर्थ क्या होगा- ”आयु“ अर्थ उम्र और ”वेद“ अर्थ ज्ञान और दीर्घायु होती है इसलिए ही इसको आयुर्वेद कहां जाता है। यह भारत की बहुत ही प्राचीन कालीन चिकित्सा पद्धति (Chikitsa Paddhati) है तथा इसकी उत्पति वैदिक काल (Vaidik Kaal) में हुई थी। ऋषि-मुनि इसके बहुत अच्छे जानकार थे। उस समय इस चिकित्सा पद्धति पर इन्होने बहुत अधिक शोध किया और जंगल में उगी वनस्पतियों (आयुर्वेदिक औषधियों) के गुण तथा दोषों की जानकारी प्राप्त किया। इसके अलावा आयुर्वेद के ज्ञान को बढ़ाने में सुश्रुत ऋषि, चरक ऋषि, बंगसेन तथा वाग्भट आदि बहुत से ऋषियों ने इसमें महत्त्वपूर्ण योगदान दिया तथा इसको पूरे संसार में फैलाने का काम किया।

आयुर्वेद के मूल सिद्धांत (Ayurved ke Mool Siddhant) के अनुसार हमारे शरीर में त्रिधातु (वात, पित्त तथाकफ) होती हैं। जब तक इनमें संतुलन बना रहता है तब तक कोई भी रोग शरीर में उत्पन्न नहीं होता और जब इनका संतुलन खराब अर्थात गड़बड़ हो जाता है, तब रोग शरीर प्रवेशकर जाता है।

आयुर्वेद उद्देश्य:

  1. स्वास्थ्य (Health ) की रक्षा करना
  2. रोगी व्यक्तियों (Patient) के विकारों (Diseases) को दूर कर उन्हें स्वस्थ बनाना (Healing)
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